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9 महीने बाद सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की धरती पर वापसी: विज्ञान बनाम भारत की राजनीति




9 महीने बाद सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की धरती पर वापसी: विज्ञान बनाम भारत की राजनीति

9 महीने के लंबे इंतजार के बाद, सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर आखिरकार धरती पर लौट रहे हैं। उनका अंतरिक्ष यान, क्रू ड्रैगन फ्रीडम, 18 मार्च को भारतीय समय के अनुसार सुबह 10:35 बजे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से रवाना हुआ और लगभग 16 घंटे की उड़ान के बाद फ्लोरिडा के तट के पास पानी में उतरा। नासा इसे "स्प्लैश डाउन" कहता है।


विज्ञान की जीत

यह वापसी इसलिए खास है क्योंकि स्टारलाइनर में तकनीकी खराबी के कारण उन्हें 9 महीने तक ISS पर रहना पड़ा। विज्ञान ने इस चुनौती को एक अवसर में बदल दिया, और यह घटना एक मील का पत्थर साबित हुई। नासा के कंट्रोल रूम में सब कुछ सामान्य था, कोई अतिरिक्त उत्साह या नाटकीयता नहीं। यह विज्ञान की शक्ति है, जो धीरज और निरंतर प्रयास से सफल होती है।


भारत में राजनीति का तमाशा

दूसरी ओर, भारत में औरंगजेब की कब्र को लेकर राजनीति गर्म है। कब्र खोदने की यह राजनीति हमें एक अंतहीन गड्ढे में धकेल रही है। जब दुनिया अंतरिक्ष में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, हम इतिहास के पन्नों में उलझे हुए हैं।


चंद्रयान और प्रधानमंत्री मोदी

2019 में चंद्रयान-2 के लॉन्च के दौरान, हमने देखा कि कैसे इसरो के मिशन को एक राजनीतिक तमाशे में बदल दिया गया। नासा के विपरीत, जहां वैज्ञानिकों का काम प्राथमिकता है, इसरो के मिशन में प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा बार-बार दिखाया गया। मिशन की विफलता पर, प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों को ढांढस बंधाया, लेकिन क्या यह राजनीतिक जिम्मेदारी थी?


चंद्रयान-3 के लॉन्च के समय भी यही हुआ। जब मिशन सफल हुआ, तो स्क्रीन पर सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा था, और उन्होंने इसे "अमृत काल की अमृत वर्षा" कहा। क्या यह वैज्ञानिकों की मेहनत का अपमान नहीं है?


ट्रंप बनाम बाइडन

अमेरिका में भी, ट्रंप ने बाइडन प्रशासन पर सुनीता और बुच को वापस लाने में देरी का आरोप लगाया। लेकिन नासा ने स्पष्ट किया कि यह देरी तकनीकी कारणों से थी, राजनीतिक हस्तक्षेप से नहीं।


अंतरिक्ष यात्रियों का दृष्टिकोण

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने कभी भी खुद को अकेला या लावारिस महसूस नहीं किया। उन्होंने हर पल का सदुपयोग किया और सकारात्मक रहे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें नहीं लगा कि उन्हें छोड़ दिया गया है।


विज्ञान बनाम संकीर्ण राष्ट्रवाद

अंतरिक्ष विज्ञान राष्ट्रवाद की संकीर्ण सोच से कहीं ऊपर है। सुनीता और बुच को वापस लाने के लिए गए अंतरिक्ष यात्रियों में अमेरिका, जापान, रूस और चीन के लोग शामिल थे। यह मानवता की जीत है।


भारत में अंधविश्वास और राजनीति

भारत में, हम अंधविश्वास में कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, जबकि अमेरिका, रूस, जापान और चीन विज्ञान में नए प्रयोग कर रहे हैं। महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर राजनीति हो रही है, जबकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।


कल्पना चावला की याद

सुनीता की वापसी कल्पना चावला की याद दिलाती है, जिन्होंने कोलंबिया मिशन में अपनी जान गंवाई थी। कल्पना की असफलता ने भविष्य के मिशनों के लिए एक सीख दी। विज्ञान यही करता है, सीखता है और आगे बढ़ता है।


निष्कर्ष

विज्ञान हमें जोड़ता है, जबकि राजनीति हमें बांटती है। सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी हमें दिखाती है कि धीरज, सकारात्मकता और विज्ञान की शक्ति से हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।

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